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देहरादून ग्रीन बिल्डिंग में देरी पर DM सख्त, CPWD की होगी जांच

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मीडिया लाइव : देहरादून ग्रीन बिल्डिंग प्रोजेक्ट में भारी देरी को लेकर जिला प्रशासन सख्त हो गया है। उत्तराखंड की पहली इंटीग्रेटेड ग्रीन बिल्डिंग का निर्माण सिर्फ 40.5 प्रतिशत ही हो पाया है, जिस पर स्मार्ट सिटी के CEO और जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने नाराजगी जताई है। उन्होंने बजट होने के बावजूद काम लटकाने पर केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) के मुख्य अभियंता को उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं और दोषी अधिकारियों से वसूली की चेतावनी दी है।

पूरी खबर विस्तार से क्या और क्यों हुआ?

यह राज्य की एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना है, लेकिन कार्यदायी संस्था की लापरवाही से प्रोजेक्ट लटका हुआ है। एक्सटर्नल सीवरेज सिस्टम, टाइल वर्क, साइट डिप्लॉयमेंट और डोर शटर फिटिंग जैसे काम जो जून माह तक शुरू होने थे, अब तक शुरू नहीं हुए। इतना ही नहीं, PERT चार्ट में भी भ्रामक और गलत जानकारी दी गई।

किसने कार्रवाई की और किस पर होगी गाज?

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने समीक्षा बैठक में CPWD के मुख्य अभियंता देवेंद्र प्रकाश को तलब किया। उन्होंने 21 करोड़ रुपये की धनराशि होल्ड करने पर भी जवाब तलब किया है। डीएम ने स्पष्ट कहा कि पर्याप्त बजट के बावजूद देरी बर्दाश्त नहीं होगी और लापरवाह एजेंसियों व अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई होगी।

कैसे और आगे क्या होगा?

जिलाधिकारी ने कार्यदायी संस्था को तुरंत सभी औपचारिकताएं पूरी कर साइट पर पर्याप्त मैनपावर, मशीनरी और मटेरियल तैनात करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वे खुद हर 15 दिन में प्रोजेक्ट की समीक्षा करेंगे। यदि प्रगति नहीं सुधरी तो कार्यदायी संस्था के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

अन्य निर्देश – बैठक में डीएम ने स्मार्ट सिटी की ई-बसों को निर्धारित रूट पर नियमित चलाने के निर्देश भी दिए और जो बसें ऑपरेशनल नहीं हैं, उनका कारण बताने को कहा। इस बैठक में संयुक्त मजिस्ट्रेट हर्षिता सिंह, स्मार्ट सिटी के ACEO तीर्थ पाल सिंह सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।