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देहरादून: 200 ऐतिहासिक धरोहरों का होगा संरक्षण, डीएम ने दिए निर्देश

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मीडिया लाइव, देहरादून: देहरादून हेरिटेज कंजर्वेशन को लेकर बड़ी पहल शुरू हुई है। राजधानी की विकास यात्रा में अब ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत भी सुरक्षित रहेगी। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की अध्यक्षता में हुई बैठक में शहर के 200 ऐतिहासिक भवनों और हेरिटेज स्थलों के संरक्षण का निर्णय लिया गया। इस बैठक में भारतीय राष्ट्रीय कला एवं सांस्कृतिक ट्रस्ट (इंटेक), द्रोणा फाउंडेशन और विभागीय अधिकारी मौजूद रहे। डीएम ने कहा कि विकास और विरासत एक-दूसरे के पूरक हैं।

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने स्पष्ट कहा कि देहरादून का विकास केवल आधुनिक सुख-सुविधाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए। वास्तविक प्रगति वही है जो आधुनिकता के साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों का सम्मान करे। शहर की ऐतिहासिक पहचान को बचाना और धरोहरों को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना भी उतना ही जरूरी है।

यह महत्वपूर्ण बैठक जिलाधिकारी कार्यालय में आयोजित की गई। इसमें मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, अपर जिलाधिकारी (वि.रा.) केके मिश्रा, संयुक्त मजिस्ट्रेट हर्षिता सिंह, जिला पर्यटन विकास अधिकारी जशपाल चौहान, द्रोणा फाउंडेशन की डॉ. पारूल, एनएचआईयू के प्रबंधक दिव्यांशु सहित टाउन प्लानिंग एवं आईएनटीएसीएच के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में तीन बड़े फैसले लिए गए। पहला, हिस्टोरिक सिटी सीरीज-2026 के तहत सभी विरासतों का पूर्ण विवरण के साथ दस्तावेजीकरण किया जाएगा। दूसरा, अक्टूबर माह में एक विशेष कार्यशाला आयोजित कर सुझाव मांगे जाएंगे और महत्वपूर्ण स्थलों का चयन कर उन्हें शहर की टाउन प्लानिंग में शामिल किया जाएगा। तीसरा, जिलाधिकारी ने पर्यटन अधिकारी को निर्देश दिए कि चयनित स्थलों के संरक्षण के लिए कंसल्टेंट हायर कर जल्द से जल्द विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर शासन को भेजा जाए।

बैठक के दौरान इंटेक और द्रोणा फाउंडेशन के प्रतिनिधियों ने जानकारी दी कि शहर का व्यापक भ्रमण कर प्राथमिक स्तर पर 200 ऐतिहासिक परिसंपत्तियों को चिन्हित कर लिया गया है। जिलाधिकारी ने कहा कि इनके संरक्षण के लिए प्रशासन, विशेषज्ञ संस्थाओं, गैर-सरकारी संगठनों तथा आमजन की सहभागिता से समन्वित प्रयास किए जाएंगे।