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सांसों पर संकट: श्रीनगर में 26 दिन जहरीली रही हवा, ओजोन 634 पार

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हिमालय की स्वच्छ हवा की कल्पना के बीच गढ़वाल की घाटी से बेहद चिंताजनक खबर है। श्रीनगर गढ़वाल वायु प्रदूषण को लेकर हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय की HASPRL लैब की एक साल की स्टडी ने चौंकाया है। 339 वैध दिनों के आंकड़ों में 169 दिन PM2.5 और 146 दिन PM10 निर्धारित सीमा से ऊपर रहा, जबकि 26 दिन ओजोन ने जहरीला स्तर पार किया। 19 दिसंबर 2025 को ओजोन का स्तर 634.13 माइक्रोग्राम तक पहुंच गया, जो मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए खतरे की घंटी है।

श्रीनगर गढ़वाल में 26 दिन जहरीली रही हवा, ओजोन 634 पार – HNBGU की रिपोर्ट में चिंताजनक खुलासा

मीडिया लाइव, श्रीनगर पौड़ी के अनुसार, श्रीनगर गढ़वाल में वायु गुणवत्ता लगातार बिगड़ रही है। भौतिकी विभाग, चौरास परिसर में मंगलवार को जारी पांचवें ग्रीनहाउस गैस एवं वायु गुणवत्ता सूचना बुलेटिन में यह खुलासा हुआ। प्रयोगशाला ने 15 सितंबर 2025 से 15 सितंबर 2026 तक डेटा का विश्लेषण किया।

कब और कितना प्रदूषण? : रिपोर्ट के अनुसार PM2.5 की औसत सांद्रता 73.30 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और PM10 की 100.48 माइक्रोग्राम रही। सबसे चौंकाने वाली घटना 19 दिसंबर 2025 की है, जब ओजोन का 8 घंटे का औसत 634.13 माइक्रोग्राम और प्रति घंटे का स्तर 880 माइक्रोग्राम से अधिक दर्ज हुआ। CO भी 22 दिन सीमा से ऊपर रहा।

क्यों बढ़ा प्रदूषण और किसने जारी की रिपोर्ट? : वैज्ञानिकों के अनुसार सर्दियों में तापमान प्रतिलोमन और घाटी में हवा फंसने से PM स्तर बढ़ता है, जबकि गर्मियों में तेज धूप और प्रकाश-रासायनिक प्रक्रिया से ओजोन बढ़ता है। मानसून में बारिश से थोड़ी राहत मिली। NO2, SO2, NH3 और बेंजीन मानकों के भीतर रहे।

ओजोन परत संरक्षण दिवस पर डॉ. आलोक सागर गौतम ने कहा, “Good Ozone is High; Bad Ozone is Nearby” – अच्छा ओजोन ऊपर और खराब ओजोन नीचे होता है। समतापमंडल का ओजोन UV से बचाता है, लेकिन जमीन के पास का ओजोन फेफड़ों और फसलों के लिए जहर है।

बुलेटिन जारी करते हुए भौतिकी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. त्रिलोक चंद्र उपाध्याय ने टीम को बधाई दी। उन्होंने डॉ. आलोक सागर गौतम और उनकी शोध टीम – अमनदीप विश्वकर्मा, अंकित कुमार और सरस्वती रावत – की जनहितकारी पहल की सराहना की।

पर्यावरण और मानव जीवन पर असर यह सिर्फ आंकड़ा नहीं, हमारी सांसों पर संकट है। घाटी में फंसा PM2.5 सीधे फेफड़ों में जाकर बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं में अस्थमा और हृदय रोग का खतरा बढ़ाता है। धरातल के पास का उच्च ओजोन आंखों में जलन, खांसी और पहाड़ की खेती को नुकसान पहुंचाता है। डॉ. गौतम ने अपील की है कि लोग पुराने AC-फ्रिज को खुले में नष्ट न करें, रेफ्रिजरेंट गैस की सुरक्षित रिकवरी कराएं और वाहन व बायोमास जलाने से बचें। हिमालय जैसे संवेदनशील क्षेत्र में निरंतर निगरानी अब जरूरी है।