
मुजफ्फरनगर कांड की बरसी: न्याय के लिए 32 साल से जारी इंतजार
अमित सिंह देहरादून, 1 अक्टूबर 2026 : उत्तराखंड राज्य आंदोलन के इतिहास में आज का दिन एक बेहद भावुक और काले अध्याय के रूप में याद किया जा रहा है, क्योंकि पूरे प्रदेश में मुजफ्फरनगर कांड की बरसी पर शहीद आंदोलनकारियों को नम आंखों से श्रद्धांजलि दी जा रही है। आज ही के दिन 2 अक्टूबर 1994 की खौफनाक रात को अलग राज्य की मांग लेकर दिल्ली कूच कर रहे निर्दोष आंदोलनकारियों पर रामपुर तिराहा पर तत्कालीन पुलिस प्रशासन ने बर्बरतापूर्वक गोलियां बरसाई थीं, जिसमें 7 आंदोलनकारी शहीद हो गए थे। इसके अलावा आंदोलन में शामिल कई महिलाओं साथ बदसलूकी और जबरदस्ती तक की गयी। इस दर्दनाक घटना की 32वीं बरसी पर राज्य भर में श्रद्धांजलि सभाएं और कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
एक तरफ राष्ट्रीय पर्व, दूसरी तरफ काला दिवस
आज 2 अक्टूबर को देश और प्रदेश भर के सरकारी कार्यालयों और शिक्षण संस्थानों में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती धूमधाम से मनाई जा रही है। अहिंसा के इन दो महान पुजारियों की जयंती के अवसर पर कई कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। लेकिन इसके साथ ही, उत्तराखंड के राज्य आंदोलनकारी इस दिन को एक काले दिवस के रूप में याद करते हैं। आज प्रदेश भर के राज्य आंदोलनकारी जगह-जगह श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित कर रहे हैं और उन दमनकारी ताकतों के खिलाफ अपना रोष प्रकट कर रहे हैं जिन्होंने उत्तराखंड की माताओं-बहनों और नौजवानों पर जुल्म ढाए थे।
राज्य आंदोलनकारियों का महान बलिदान : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून देहरादून कचहरी और रामपुर तिराहा स्थित शहीद स्थल पहुंचे और शहीदों को श्रद्धांजलि दी। मुख्यंत्री ने कार्यक्रम में कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के अदम्य संघर्ष, त्याग और बलिदान के परिणामस्वरूप ही पृथक उत्तराखण्ड राज्य का सपना साकार हो सका। राज्य निर्माण में उनके योगदान और बलिदान को सदैव श्रद्धा एवं कृतज्ञता के साथ स्मरण किया जाता रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि शहीदों के इस ऋण को कभी नहीं चुकाया जा सकता, लेकिन उनके सपनों का समृद्ध उत्तराखंड बनाना ही हमारी पहली प्राथमिकता है।
न्याय के लिए 32 साल का लंबा इंतजार
रामपुर तिराहा कांड में उत्तराखंड के सात लोग शहीद हुए थे, जिनके परिजनों को 32 साल बाद भी पूरी तरह न्याय मिलने का इंतजार है। 1 और 2 अक्टूबर 1994 की दरमियानी रात को अलग राज्य की मांग कर रहे इन निर्दोष लोगों पर तत्कालीन पुलिस बल ने हिंसक लाठीचार्ज और अंधाधुंध गोलीबारी की थी। इस खौफनाक रात में कई महिला आंदोलनकारियों के साथ दुर्व्यवहार और दुष्कर्म जैसी अमानवीय घटनाएं भी सामने आई थीं।
इस दर्दनाक हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। आज मुजफ्फरनगर कांड की बरसी पर पूरे प्रदेश के विभिन्न जनसंगठनों ने भी मोमबत्तियां जलाकर शहीदों को याद किया। हालांकि लंबे कानूनी संघर्ष के बाद मार्च 2024 में पहली बार कोर्ट ने दो दोषी पीएसी सिपाहियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई, लेकिन आंदोलनकारी मंचों का कहना है कि मुख्य साजिशकर्ताओं को सजा मिलने तक उनकी लड़ाई जारी रहेगी।
ये भी पढ़ें : मसूरी गोलीकांड की 31वीं बरसी, याद किए जा रहे हैं शहीद
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने दी श्रद्धांजलि
इस भावुक अवसर पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने भी शहीदों को नमन किया। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व सीएम हरीश रावत ने भी राज्य आंदोलन के शहीदों को याद कर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने फेसबुक और सोशल मीडिया के माध्यम से जनता को संबोधित करते हुए कहा कि, “रामपुर तिराहा गोलीकांड की बरसी पर उत्तराखण्ड राज्य निर्माण के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले सभी अमर राज्य आंदोलनकारियों को विनम्र श्रद्धांजलि।”
हरीश रावत ने राज्य आंदोलन के दिनों को याद करते हुए कहा कि आंदोलनकारियों का यह बलिदान हमारी आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने राज्य के विकास में शहीदों के सपनों को सर्वोपरि रखने की बात कही।
पृथक राज्य उत्तराखंड की मांग को लेकर देहरादून से शांति पूर्ण ढंग निहत्थे दिल्ली जा रहे वे 7 आंदोलनकारी, जो मुजफ्फरनगर (रामपुर तिराहा) कांड में हुए शहीद
क्र.सं. शहीद आंदोलनकारी का नाम मूल निवास स्थान (पता)
1. स्व. रविन्द्र सिंह रावत (उर्फ गोलू) नेहरू कॉलोनी, देहरादून
2. स्व. सत्येन्द्र चौहान भानियावाला (या भालावाला), देहरादून
3. स्व. गिरीश भद्री (भंडारी) बद्रीपुर, देहरादून
4. स्व. राजेश लखेड़ा अजबपुर, देहरादून
5. स्व. सूर्य प्रकाश थपलियाल (सूर्य कुमार शर्मा) ऋषिकेश, देहरादून
6. स्व. राजेश नेगी भानियावाला, देहरादून
7. स्व. अशोक कुमार ऊखीमठ, रुद्रप्रयाग