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आप जजों पर भरोसा नहीं करेंगे तो संस्थान ध्वस्त हो जाएगा

मीडिया लाइव: मानवाधिकार कार्यकर्ता हर्ष मंदर ने घुसपैठियों के केंद्रों की कथित नारकीय हालत को लेकर याचिका दायर की थी। सीजेआई गोगोई ने कहा कि इस तरह के आवेदन संस्थान में व्यवधान पैदा करने जैसे हैं। सुनवाई के दौरान की जाने वाली टिप्पणी बहस का हिस्सा होती है। जिस दिन आप जजों पर विश्वास नहीं करेंगे, उस दिन क्या होगा? आपको जजों पर विश्वास करने की कोशिश करनी चाहिए। अगर संस्थान नष्ट हो जाएगा तो क्या होगा? असम में घुसपैठियों से संबंधित मामले की सुनवाई से चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के अलग होने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई है। अपील खारिज करते हुए चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अगर आप जजों पर भरोसा नहीं करेंगे तो संस्थान ध्वस्त हो जाएगा।

पीठ ने मंदर को इस मामले में याचिकाकर्ता की सूची से भी हटा दिया और उनकी जगह सुप्रीम कोर्ट विधिक सेवा प्राधिकरण को याचिकाकर्ता बना दिया है। पीठ ने कोर्ट की मदद के लिए वकील प्रशांत भूषण को एमाइकस क्यूरी नियुक्त किया है। इससे पहले मंदर ने कहा था कि इस मामले में सीजेआई की ओर से कुछ टिप्पणियां की गई हैं जिससे इस मामले की दिशा ही बदल गई है। पीठ ने मंदर से कहा कि आप मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं लेकिन क्या कोर्ट को आपके कहे पर चलना चाहिए? आप वादी हैं, सीमा न लांघें। बहस के दौरान हम जो कहते हैं, वह पक्षपात नहीं होता। हम सारी चीजों को टटोलते हैं। इससे पहले मंदार ने कहा था कि मुख्य न्यायधीश ने घुसपैठियों को डिपोर्ट न करने को लेकर असम सरकार पर सवाल उठाया था। उनकी टिप्पणी से देश में भय का वातावरण बन गया है।

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