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चुनावी समीक्षा 2027: वोटर लिस्ट विवाद के बीच देहरादून में प्रशासन का कड़ा रुख, अधिकारी अलर्ट

सतेंद्र रावत, देहरादून, 4 अक्टूबर 2026: उत्तराखंड में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर राज्य में चुनावी समीक्षा की प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। देश भर में वोटर लिस्ट में चल रही विसंगतियों के विवाद के बीच भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के उच्च अधिकारियों का एक दल आगामी 12 व 13 अक्टूबर को देहरादून का भ्रमण कर निर्वाचन व्यवस्थाओं का जायजा लेगा। इस महत्वपूर्ण विजिट के मद्देनजर जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने शनिवार को देहरादून में निर्वाचन से जुड़े सभी नोडल अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की, जिसमें उन्होंने समयबद्ध ढंग से सभी आवश्यक तैयारियां पूरी करने के कड़े निर्देश दिए हैं।

केंद्रीय दल के आगमन से पहले ग्राउंड पर चुनावी समीक्षा तेज

भारत निर्वाचन आयोग के उच्च अधिकारियों का उत्तराखंड दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब मतदाता सूचियों को लेकर देशव्यापी राजनीतिक माहौल काफी समय से गर्म है। यही वजह है कि जिला प्रशासन इस विजिट को बेहद गंभीरता से ले रहा है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने स्पष्ट किया है कि उत्तराखंड विधानसभा चुनाव को पारदर्शी बनाने के लिए हर स्तर पर मुस्तैदी जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि निर्वाचन संबंधी सभी व्यवस्थाएं समयबद्ध ढंग से पूरी करते हुए धरातल पर जरूरी बुनियादी ढांचा सुनिश्चित किया जाए।

अधिकारियों का डेटाबेस और ईवीएम-वीवीपैट की UPDATE

बैठक के दौरान जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने निर्देश दिए कि जनपद देहरादून में उपलब्ध सभी सरकारी विभागों के कार्मिकों का एक अद्यतन (Updated) डेटाबेस शीघ्र तैयार कर लिया जाए। इसके साथ ही, निर्वाचन के लिए वेयरहाउस में उपलब्ध ईवीएम (EVM) एवं वीवीपैट (VVPAT) मशीनों की वर्तमान स्थिति का सटीक आकलन करते हुए अतिरिक्त मशीनों की आवश्यकता का पूरा विवरण तैयार किया जाए। उन्होंने ईवीएम एवं वीवीपैट की प्रथम स्तरीय जांच (FLC) के लिए आवश्यक तकनीकी व भौतिक व्यवस्थाएं समय से सुनिश्चित करने के निर्देश भी जारी किए।

संवेदनशील मतदान केंद्रों की मैपिंग और सुरक्षा व्यवस्था

प्रशासनिक स्तर पर पुख्ता इंतजाम करने के लिए जिलाधिकारी ने सभी उप जिलाधिकारियों (SDMs) को संवेदनशील एवं अति संवेदनशील सहित सभी मतदान केंद्रों की भौतिक मैपिंग का कार्य तत्काल सुनिश्चित करने को कहा। इसके साथ ही, आगामी विधानसभा निर्वाचन से संबंधित आवश्यक टेंडर प्रक्रिया को ससमय पूरा करने और विभिन्न जरूरी समितियों का गठन शीघ्र करने के निर्देश दिए गए। सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से उन्होंने पुलिस विभाग को निर्देश दिया कि वे वर्तमान में उपलब्ध सुरक्षा बलों का विवरण तैयार करने के साथ ही निर्वाचन के दौरान आवश्यक अतिरिक्त सुरक्षा बलों का आकलन कर अपनी मांग जल्द शासन को प्रस्तुत करें।

स्वीप (SVEEP) कार्यक्रमों के जरिए मतदान में जनभागीदारी बढ़ाने पर जोर
निर्वाचन प्रक्रिया में आम जनता की सहभागिता बढ़ाने के उद्देश्य से जिलाधिकारी ने विशेष निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आगामी चुनावों में अधिकाधिक मतदाताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्थित मतदाता शिक्षा एवं निर्वाचक सहभागिता (SVEEP) कार्यक्रमों पर अभी से विशेष ध्यान दिया जाए। इसके तहत देहरादून जनपद के विभिन्न प्रमुख शिक्षण संस्थानों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थलों पर व्यापक स्तर पर जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जाएं ताकि आम नागरिकों को मतदान के प्रति प्रेरित किया जा सके।
उन्होंने शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित चुनाव संपन्न कराने के लिए कार्मिकों के उन्नत प्रशिक्षण, पोलिंग पार्टियों की रवानगी एवं वापसी, ईवीएम वेयरहाउस तथा मतगणना स्थलों पर सभी आवश्यक सुविधाएं समय रहते पूरी करने पर जोर दिया।
इस महत्वपूर्ण बैठक में जिला प्रशासन के कई शीर्ष अधिकारी व्यक्तिगत और वर्चुअल माध्यम से मौजूद रहे। देहरादून में आयोजित इस भौतिक समीक्षा बैठक में उप जिला निर्वाचन अधिकारी अभिनव शाह, अपर जिला निर्वाचन अधिकारी केके मिश्रा, और अपर जिलाधिकारी प्रशासन स्मृता परमार सहित सभी संबंधित विभागों के नोडल अधिकारी उपस्थित थे। इसके अतिरिक्त, जनपद के सभी उप जिलाधिकारी (SDMs) वर्चुअल माध्यम से जुड़कर इस चुनावी समीक्षा बैठक का हिस्सा बने और अपने-अपने क्षेत्रों की प्रगति रिपोर्ट साझा की।
निष्पक्ष चुनाव की दिशा में प्रशासन की कवायद
चुनावी समीक्षा के इस पूरे घटनाक्रम को यदि राजनीतिक और प्रशासनिक चश्मे से देखा जाए, तो भारत निर्वाचन आयोग का यह आगामी देहरादून दौरा महज एक रूटीन प्रक्रिया नहीं है। देश के विभिन्न हिस्सों में हाल ही में मतदाता सूचियों (Voter Lists) को लेकर उठे राजनीतिक विवादों और आरोपों-प्रत्यारोपों ने चुनाव प्रणालियों की विश्वसनीयता पर एक व्यापक चर्चा को जन्म दिया है। ऐसे संवेदनशील माहौल में, उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 से ठीक पहले केंद्रीय दल का धरातल पर उतरना यह साफ संकेत देता है कि आयोग राज्य में किसी भी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक चूक की गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहता।
जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की ओर से ईवीएम-वीवीपैट की प्रथम स्तरीय जांच (FLC) समय से कराने, संवेदनशील मतदान केंद्रों की मैपिंग करने और सुरक्षा बलों का एडवांस एसेसमेंट करने के निर्देश यह दर्शाते हैं कि स्थानीय प्रशासन किसी भी संभावित विसंगति को रोकने के लिए ‘प्रो-एक्टिव’ मोड में काम कर रहा है। इसके साथ ही, लोकतंत्र में केवल सुरक्षित चुनाव कराना ही काफी नहीं होता, बल्कि जनता की भागीदारी भी उतनी ही अहम है। प्रशासन की ओर से स्वीप (SVEEP) कार्यक्रमों के जरिए युवाओं और आम जनता को जागरूक करने की रणनीति एक सकारात्मक कदम कही जा सकती है, जो आगामी चुनावों में वोटिंग प्रतिशत बढ़ाने में मददगार साबित हो सकती है। कुल मिलाकर, 12 और 13 अक्टूबर की यह चुनावी समीक्षा बैठक उत्तराखंड में स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव की मजबूत बुनियाद रखने के प्रशासनिक और संवैधानिक उद्देश्यों को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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