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उत्तराखंड में मीठे जल संसाधन और स्प्रिंगशेड प्रबंधन पर राष्ट्रीय संगोष्ठी

मीडिया लाइव, श्रीनगर / 30/09/2026 : स्प्रिंगशेड प्रबंधन संगोष्ठी के तहत हिमालयी क्षेत्र में जल सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है।भौगोलिक सोसायटी ऑफ उत्तराखंड (GSUK) के तत्वावधान में “Freshwater Resources and Springshed Management” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन आज 30 सितंबर 2026 को हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर गढ़वाल के भूगोल विभाग में किया जा रहा है। संगोष्ठी का उद्देश्य हिमालयी जलस्रोतों के क्षरण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच समाधान तलाशना है।

स्प्रिंगशेड प्रबंधन संगोष्ठी का आयोजन कहाँ और किसके द्वारा?

कार्यक्रम का आयोजन स्कूल ऑफ अर्थ साइंसेज, भूगोल विभाग, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय (केंद्रीय विश्वविद्यालय), श्रीनगर गढ़वाल के आतिथ्य में हो रहा है। इस राष्ट्रीय संगोष्ठी के संयोजक प्रो. एम. एस. पंवार, भूगोल विभाग हैं। इसमें विभिन्न विश्वविद्यालयों, संस्थानों से शिक्षाविद, वैज्ञानिक, शोधार्थी, विद्यार्थी, नीति-निर्माता तथा स्थानीय हितधारक प्रतिभाग करेंगे।

स्प्रिंगशेड प्रबंधन की आवश्यकता क्यों पड़ी?

हिमालय क्षेत्र में जलस्रोतों, विशेषकर प्राकृतिक झरनों (Springs) का स्थानीय समुदायों के जीवन, आजीविका, कृषि, जैव विविधता तथा पारिस्थितिक संतुलन में महत्वपूर्ण योगदान है। जलवायु परिवर्तन, अनियोजित विकास, भूमि उपयोग में परिवर्तन, वनों पर बढ़ते दबाव तथा जलस्रोतों के क्षरण के कारण हिमालयी क्षेत्रों में जल उपलब्धता एवं झरनों के पुनर्जीवन की चुनौती लगातार गंभीर होती जा रही है।

इस संदर्भ में स्प्रिंगशेड प्रबंधन जलस्रोतों के संरक्षण, पुनर्भरण एवं दीर्घकालिक जल सुरक्षा के लिए एक समग्र एवं समुदाय-आधारित दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।

संगोष्ठी के मुख्य उद्देश्य और चर्चा के विषय

संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य हिमालयी क्षेत्रों में मीठे जल संसाधनों की स्थिति, झरनों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन, जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन, भूजल पुनर्भरण, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव तथा समुदाय-आधारित स्प्रिंगशेड प्रबंधन से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श को बढ़ावा देना है।

संगोष्ठी के दौरान निम्न विषयों पर विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे:

प्राकृतिक झरनों का वैज्ञानिक अध्ययन

जल संसाधन प्रबंधन और पारंपरिक जल ज्ञान

स्थानीय समुदायों की भूमिका

GIS एवं रिमोट सेंसिंग आधारित जलग्रहण क्षेत्र विश्लेषण

हिमालयी क्षेत्रों में जल सुरक्षा

विशेषज्ञों द्वारा जलस्रोतों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन के लिए वैज्ञानिक तथा समुदाय-आधारित उपायों पर भी चर्चा की जाएगी। यह संगोष्ठी “जल संरक्षण, जल पुनर्भरण और समुदाय की भागीदारी” को केंद्र में रखते हुए सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगी।

भारत में जल संसाधनों की स्थिति के लिए – Central Ground Water Board – http://भारत में जल संसाधनों की स्थिति के लिए – Central Ground Water Board – http://cgwb.gov.in

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