शिक्षा-खेल

आरटीई के तहत 10 स्कूलों का भौतिक सत्यापन शुरू, बीआर मॉडर्न में खामी

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मीडिया लाइव: पौड़ी जिले में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत दाखिला लेने वाले छात्र-छात्राओं की वास्तविक पढ़ाई की स्थिति और स्कूलों की व्यवस्थाओं की जांच शुरू हो गई है। पहले चरण में 10 स्कूलों को सत्यापन के लिए चुना गया है। इसी क्रम में जिला शिक्षाधिकारी (प्राथमिक) के निर्देश पर बीआर मॉडर्न स्कूल का मौके पर जाकर सत्यापन किया गया। जांच के दौरान स्कूल में कई अनियमितताएं सामने आई हैं। विभाग ने सभी चिन्हित स्कूलों की जांच पूरी कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।

जिले में RTE के तहत पढ़ रहे बच्चों और स्कूलों की व्यवस्थाओं की जांच चल रही है। पहले चरण में 10 स्कूलों को चिन्हित किया गया है। इसी में जिला शिक्षाधिकारी (प्राथमिक) के निर्देश पर बीआर मॉडर्न स्कूल का सत्यापन किया गया तो कई खामियां मिलीं। अभिलेखों के अनुसार बीआर मॉडर्न स्कूल को साल 2024 से 2029 तक नर्सरी से कक्षा 8 तक की मान्यता मिली हुई है। सत्र 2026-27 में RTE के तहत इसमें 5 बच्चों का प्रवेश दिखाया गया है। लेकिन मौके पर जांच में ये 5 बच्चे बीआर मॉडर्न में नहीं, बल्कि करीब एक किलोमीटर दूर महेश सरला चिल्ड्रन्स एकेडमी में पढ़ते मिले।

यह एकेडमी बिना मान्यता के चल रही है और इसी परिसर में बड़ी संख्या में अन्य बच्चे भी पढ़ते मिले।जांच में यह भी मिला कि बच्चों से फीस महेश सरला चिल्ड्रन्स एकेडमी के नाम पर ली जा रही है, जबकि इस नाम की कोई अलग मान्यता का कागज नहीं मिला। यह संस्थान यू-डायस पोर्टल पर भी रजिस्टर्ड नहीं है। इससे लग रहा है कि बीआर मॉडर्न की मान्यता की आड़ में महेश सरला चिल्ड्रन्स एकेडमी चलाई जा रही है। महेश सरला चिल्ड्रन्स एकेडमी में प्री-प्राइमरी की कक्षाएं चल रही थीं और कुछ कक्षाएं गैलरी और बरामदे में लग रही थीं। भवन में बच्चों की सुरक्षा और आपदा प्रबंधन में भी कमियां मिलीं। बीआर मॉडर्न स्कूल में NCERT की किताबों की जगह दूसरे प्रकाशकों की महंगी किताबें लगाई जा रही थीं। कक्षा 1 की छात्र पंजिका देखने पर कुछ बच्चे ऐसे भी मिले जिनकी उम्र प्रवेश के लिए तय उम्र से कम थी।

जिला शिक्षाधिकारी (प्राथमिक) अंशुल बिष्ट ने बताया कि जांच में मिले तथ्यों पर स्कूल से जवाब मांगा जा रहा है और नियम के अनुसार कार्रवाई शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि RTE और शिक्षा विभाग के नियमों का पालन कराना विभाग की प्राथमिकता है।

उन्होंने कहा कि कार्रवाई के दौरान बच्चों की पढ़ाई को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाएगा और किसी भी बच्चे का सत्र खराब नहीं होने दिया जाएगा। बच्चों और अभिभावकों के हितों को ध्यान में रखकर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।