
स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही पर DM सख्त, ANM निलंबित
देहरादून/ 1/10/2026 : स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही को लेकर देहरादून के जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने सख्त रुख अपनाया है। स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही के एक मामले में एएनएम को मौके पर ही निलंबित कर दिया गया है। मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को घटाने के लिए टास्क फोर्स गठित करने के निर्देश दिए गए हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही पर DM की सख्ती
देहरादून, 30 सितंबर: जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत मातृ मृत्यु, शिशु मृत्यु एवं राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा बैठक की। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान कर वहां स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत किया जाए। पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों का विश्लेषण कर जीआईएस मैपिंग से उन क्षेत्रों को चिह्नित किया जाए जहां मृत्यु दर अधिक है।
स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही का मामला – 12 केसों की समीक्षा
वर्ष 2026 में अब तक प्रसव के दौरान अथवा प्रसव के कुछ समय बाद हुई 12 महिलाओं की मृत्यु के मामलों की केस स्टडी की गई। इनमें चार मामलों में संबंधित अधिकारियों से स्पष्ट आख्या तलब की गई। प्रेमनगर निवासी रुखसाना की मृत्यु के मामले में आशा एवं एएनएम से प्राप्त स्पष्टीकरण में विरोधाभास, आंकड़ों में छेड़छाड़ तथा साक्ष्य के लिए गलत तिथि के फोटोग्राफ प्रस्तुत किए जाने पर जिलाधिकारी ने एएनएम के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई के निर्देश दिए।
स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही रोकने को टास्क फोर्स
देहरादून, 30 सितंबर: जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत मातृ मृत्यु, शिशु मृत्यु एवं राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा बैठक की। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।उन्होंने निर्देश दिए कि अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान कर वहां स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत किया जाए। पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों का विश्लेषण कर जीआईएस मैपिंग से उन क्षेत्रों को चिह्नित किया जाए जहां मृत्यु दर अधिक है।
टीबी जांच में स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही पर नाराजगी
राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा में जनसंख्या के अनुपात में अपेक्षित जांच एवं एक्स-रे नहीं होने पर नाराजगी व्यक्त की गई। टीबी जांच का दायरा बढ़ाने तथा निजी क्षेत्र को भी अभियान से जोड़ने के निर्देश दिए। इस अवसर पर पांच टीबी चौम्पियनों को सम्मानित किया गया।
मातृ-शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में देहरादून बेहतर
प्रोग्राम ऑफिसर ने बताया कि एचआईएमएस 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार देहरादून का मातृ मृत्यु अनुपात 31.0 है, जबकि उत्तराखंड में 99 और राष्ट्रीय स्तर पर 97 है। यह 2030 के राष्ट्रीय लक्ष्य 70 से भी कम है।नवजात शिशु मृत्यु दर 10.4 है, जबकि राज्य में 13 और राष्ट्रीय स्तर पर 20 है। शिशु मृत्यु दर 13.8 है, जबकि राज्य में 19 और देश में 28 है। पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर 16.0 है, जो लक्ष्य 25 से नीचे है।हालांकि जन्म के समय लिंगानुपात 924.4 है, जो उत्तराखंड के 984 और राष्ट्रीय औसत 929 से कम है।
बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एमके शर्मा, गायनी विशेषज्ञ डॉ. ज्योति शर्मा, प्रोग्राम ऑफिसर प्रखर, विभिन्न अस्पतालों के वरिष्ठ चिकित्सक, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के चिकित्सा अधिकारी, एएनएम एवं आशा कार्यकत्रियां उपस्थित रहीं।
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