
दर्दनाक मौत: श्रीनगर में 48 साल की महिला को गुलदार ने घसीटा, खौफनाक हमले से गांव में मातम
गणेश नेगी, श्रीनगर/पौड़ी, 10 अक्टूबर 2026, : दर्दनाक मौत ने एक बार फिर पहाड़ के गांवों को हिला कर रख दिया है। श्रीनगर से लगभग नौ किमी दूर खंडाह के पास के जंगल में 48 वर्षीय बीना देवी की गुलदार ने जान ले ली। वह शुक्रवार शाम करीब चार बजे अन्य महिलाओं के साथ घास लेने गई थीं। घास काटते समय गुलदार ने पीछे से झपट्टा मार दिया और उन्हें घसीटने लगा। साथ गई महिलाओं ने हिम्मत दिखाकर शोर मचाया तो गुलदार उन्हें छोड़कर भाग गया, लेकिन तब तक बीना देवी की सांसें थम चुकी थीं।
शुक्रवार की शाम रोज की तरह सामान्य थी। तरुली गांव की महिलाएं टोली बनाकर जंगल घास लेने गईं। बीना देवी भी उनके साथ थीं।सब अपनी-अपनी जगह घास काट रही थीं। तभी झाड़ियों में छिपे गुलदार ने बीना देवी पर हमला कर दिया। यह हमला इतना आक्रामक था कि आसपास की महिलाओं को भनक तक नहीं लगी। जब गुलदार बीना को घसीट कर ले जाने लगा, तब महिलाओं की नजर उस पर पड़ी। उन्होंने तुरंत चिल्लाना शुरू कर दिया और जोर-जोर से आवाज लगाई। शोर सुनकर गुलदार बीना को वहीं छोड़कर घने जंगल में भाग गया। लेकिन तक उसकी दर्दनाक मौत हो चुकी थी।
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श्रीनगर गढ़वाल से लगभग 9 किमी दूर खंडाह के पास का जंगल। यह जंगल बछेली ग्रामसभा के तरुली गांव से लगा हुआ है। यही वह जगह है जहां गांव की महिलाएं रोज घास लेने जाती हैं।यह इलाका घना है और पहले भी यहां गुलदार देखे जाने की बात सामने आती रही है।
ग्राम प्रधान कुलदीप गुसाईं ने कहा कि क्षेत्र में लगातार गुलदार दिखाई दे रहा है। लोगों में दहशत का माहौल है।उन्होंने बताया, “वन विभाग को कई बार इसकी सूचना भी दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब हमारी मांग है कि गुलदार को नरभक्षी घोषित कर मारने के आदेश दिए जाएं।”
कैसे दिया गुलदार ने वारदात को अंजाम?
यह दर्दनाक मौत बताती है कि गुलदार कितनी चालाकी से हमला करता है।वन्यजीव जानकारों के मुताबिक, गुलदार अक्सर शाम के समय शिकार पर निकलता है। वह झाड़ियों में छिपकर इंतजार करता है और मौका मिलते ही गर्दन पर वार करता है। बीना देवी के साथ भी ऐसा ही हुआ।ग्रामीणों का कहना है कि वह घास काटने में झुकी हुई थीं, इसलिए उन्हें गुलदार के आने का पता ही नहीं चला।
क्यों बढ़ रहा है खतरा और अब क्या कर रहा है विभाग?
पहला कारण है जंगल में जंगली जानवरों की कमी। दूसरा, गांवों का जंगल की सीमा तक फैल जाना। तीसरा, शाम के समय अकेले या छोटे समूह में जंगल जाना।
इस दर्दनाक मौत के बाद डीएफओ पौड़ी महातिम यादव ने तुरंत एक्शन लिया। उन्होंने बताया कि विभाग की एक टीम मौके पर पहुंची है। क्षेत्र में वेब कैमरे लगाए जा रहे हैं, गश्त बढ़ा दी गई है। शूटर तैनात कर दिए गए हैं और पिंजरा लगा दिया गया है। मुआवजा राशि देने की प्रक्रिया चल रही है। परिवार वालों का कहना है कि अंतिम संस्कार के बाद इस बारे में सोचा जाएगा।
फिलहाल पूरे तरुली गांव में इस दर्दनाक मौत के बाद मातम और खौफ दोनों है। महिलाएं अब जंगल जाने से डर रही हैं।