उत्तराखण्ड न्यूज़

MEDIA LIVE : COVID -19: यकीन करना ही होगा खाकी में भी इंसानियत बसती है

FacebookTwitterGoogle+WhatsAppGoogle GmailWeChatYahoo BookmarksYahoo MailYahoo Messenger

मीडिया लाइव, देहरादून : पुलिस वालों को लेकर अमूमन आम जनमानस अच्छी सोच नहीं रखता. इसके अपने कारण हो सकते हैं. इसीलिए पुलिस वालों के बारे में एक कहावत आमतौर पर गाहे-बगाहे बड़ी आसानी से सुनने को मिल जाती है कि ! “पुलिस की न दोस्ती अच्छी, न दुश्मनी “ शायद इसीलिए भारतीय पुलिस का चेहरा और इमेज कभी ब्रिटिश पुलिस के दौर से बाहर निकलकर, अलग नहीं बन पाई, जबिक अंग्रेजो के अपने देश में पुलिस में जाने कितने सुधार हुए. लेकिन भारत में पुलिस को लेकर कभी लोगों में सुरक्षा और सेवा का भाव पैदा नहीं हुआ. यहां पुलिस को डराने के तौर पर ज्यादा देखा जाता है, बजाए सुरक्षा के एक महत्वपूर्ण अंग के. लेकिन इस मामले में उत्तराखण्ड के अलग राज्य बनने के बाद अगर एक-दो बड़ी घटनाओं को छोड़कर देखा जाय, तो देश के अन्य राज्यों की तुलना में यहां की पुलिस काफी सकारात्मक दिखाई देती है. इस वक्त वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण जहां हर आमोखास के सामने मौत बनकर खड़ी है. दुनियाभर के देशों में लॉकडाउन के हालत हैं. लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट उससे भी ज्यादा भयावह रूप में देखा जा रहा है. रोज खाने-कमाने वाले मजदूर वर्ग के सामने  दो वक्त की रोटी का भरोसा नहीं है. ऐसे में कई संस्थानों के सामने मानवता को बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है. ऐसे में पुलिस को लेकर भला कोई कैसे ? ऐसी मदद की उम्मीद कर सकता है. क्योंकि उसकी छवि ठीक इसके उलट है. लेकिन इस भयानक बीमारी ने हमारे पुलिस बल की छवि में चार चांद लगा दिए है. खास कर उत्तराखण्ड पुलिस की बात यहाँ पर दीगर हो जाती है. आज उत्तराखण्ड पुलिस की खाकी वर्दी धारियों ने ऐसी मिसाल पेश कर दी है, जो हर किसी के लिए आदर्श पुलिस का चेहरा बनकर दिख रही है. खाकी में इंसान और इंसानियत भी बसती है, अगर कहीं देखना है तो इस उत्तराखण्ड पुलिस को देख कर अंदाजा लगाया जा सकता है.
देहरादून राजधानी है. यहां पुलिस पर इस वक्त बेतहासा दबाव है. यह दबाव किसी आपराधिक घटना को रोकने या किसी सियासी प्रभाव का नहीं है. ये दबाव है, बड़ी संख्या में गरीब बस्तियों, दिहाड़ी मजदूरों, मांग कर खाने वालों, कूड़ा बिन कर रोजी रोटी कमाने वालों को भरपेट भोजन खिलाने का. हर जरूरत मंद तक पहुंचने का, बीमार होने पर उसकी सुध लेने का. यूं तो पूरे प्रदेश में पुलिस क्या शहर क्या-गांव, क्या मैदान क्या पहाड़. दूर-दूर तक भारी थकावट के बाद भी अपनी सेवाएं दे रही है. लेकिन राजधानी क्षेत्र में जनसंख्या घनत्व के लिहाज से हर एक जरूरतमंद तक खाना और जरूरत के समय में दवा पहुंचाना बड़ी चुनौती बना हुआ है. बिना अपने परिवार की चिंता किये बगैर.
अब बात करते हैं यहां के नेहरू कॉलोनी थाना क्षेत्र की. जबसे लॉकडाउन हुआ है तब से इस थाने की सभी चैकियां पूरी शिद्दत से अपनी ड्यूटी में जुटी हैं. लेकिन अब थानाध्यक्ष दिलबर सिंह नेगी के नेतृत्व में पूरा थाना क्षेत्र में तैनात पुलिस कर्मियों ने एक बड़ा बीड़ा उठाया है. जिस पर यकीन करना थोड़ा कठिन है क्योंकि की पुलिस से इस तरह की उम्मीद आम जन कम ही करते हैं. लेकिन ये सच है और आपको इस पर यकीन न करने के लिए कोई वजह भी नहीं हो सकती.
जी हाँ इस थाने की पुलिस ने एक अपने लिए एक नारा गढ़ा है “हर जरूरतमंद परिवार है, अपना परिवार”
देहरादून के थाना नेहरू कॉलोनी में तैनात के 113 जवानों ने थाना क्षेत्र में निवासरत 124 जरूरतमंद परिवारों को अपना परिवार मानकर लॉकडाउन तक उनको राशन, भोजन, दवाई आदि उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी ली है। देहरादून के इस पुलिस स्टेशन से जरूरत मंदों के लिए कभी भी ये मदद ले सकते हैं. सघन आबादी वाले इस थाना क्षेत्र में हजारों की तादाद में ऐसे लोग रहते हैं. जिनका इन दिनों चूल्हा तो क्या ही जल रहा होगा, बल्कि दो वक्त की बजाय एक वक्त भी खाना मिल रहा होगा ये कह पाना मुश्किल है. लेकिन जो भी है यहां की पुलिस ने सच में ,एक बडा मिशन हाथ में लिया है. उम्मीद की जानी चाहिए कि समाज के उस हर वर्ग को इनके साथ खड़ा हो जाना चाहिए, जो सक्षम है और किसी और को भूखा न देखने की इच्छा मन में रखते हैं. इसलिए मीडिया लाइव भी आपसे आह्वान करता है, आप भी मुसीबत की इस घड़ी में ,जब मानवता का अस्तित्व खतरे में है, पुलिस के सहयोगी बनें उनका हाथ बँटायें.