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IFS तबादले: उत्तराखंड में 5 अफसरों का चौंकाने वाला फेरबदल, देखें किसे कहां भेजा गया

धीरेन्द्र भट्ट, देहरादून 10 अक्टूबर 2026 :IFS तबादले को लेकर उत्तराखंड वन विभाग में बड़ा और चौंकाने वाला फेरबदल हुआ है। शासन ने अगस्त में हुए बड़े फेरबदल के ठीक एक महीने बाद ही फिर से 5 भारतीय वन सेवा अधिकारियों के तबादले कर दिए हैं। इस बार APCCF से लेकर DFO स्तर तक के अफसर बदले गए हैं, जिसमें कॉर्बेट टाइगर रिजर्व और राजाजी नेशनल पार्क जैसे दो सबसे संवेदनशील पार्कों के उपनिदेशक भी शामिल हैं। सभी अधिकारियों को तत्काल नई जगह पर जॉइन करने के निर्देश दिए गए हैं।

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इस बार के IFS तबादले में तीन बातें सबसे ज्यादा चौंकाने वाली हैं

पहला, टाइमिंग: अगस्त 2026 में ही विभाग में 20 से अधिक IFS अफसरों का बम्पर ट्रांसफर हुआ था। उसके सिर्फ एक महीने बाद फिर से 5 बड़े चेहरों को बदलना प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।

दूसरा, जगहों की संवेदनशीलता: जिन पदों पर बदलाव हुआ है, वे सभी हाई-प्रोफाइल हैं। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व देश का सबसे पुराना और सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला टाइगर रिजर्व है। राजाजी नेशनल पार्क में हाथी और टाइगर का मूवमेंट लगातार बना रहता है। और पिथौरागढ़, जो नेपाल और चीन सीमा से लगा हुआ संवेदनशील वन प्रभाग है, वहां भी DFO बदल दिया गया है। पर्यटन सीजन से ठीक पहले ऐसे अहम पदों को बदलना चौंकाने वाला माना जा रहा है।

तीसरा, कारणों का अलग-अलग होना: किसी का तबादला जनहित में, किसी का प्रशासनिक जरूरत पर तो किसी का खुद के अनुरोध पर पारिवारिक परिस्थितियों के चलते किया गया है। इतने अलग-अलग कारणों से एक साथ हुए तबादले पहले कम ही देखे गए हैं।

शासन द्वारा जारी आदेश के मुताबिक हर IFS तबादले के पीछे ठोस वजह बताई गई है। प्रशासनिक जरूरत को मुख्यालय में काम को तेज करने के लिए कारण बताया गया है। जनहित और विभागीय कामकाज को सुचारू बनाना तराई पूर्वी जैसे बड़े प्रभाग के लिए वजह बनी। पारिवारिक परिस्थितियों के आधार पर एक अधिकारी ने खुद अनुरोध किया था, जिसे शासन ने मान लिया। वहीं वन्यजीव संरक्षण और संवेदनशीलता को कॉर्बेट जैसे पार्क में बेहतर प्रबंधन के लिए आधार बनाया गया है।

किसे कहां की जिम्मेदारी मिली

इस IFS तबादले में जिन 5 अधिकारियों के नाम हैं, उनके नाम और पद में कोई बदलाव नहीं किया गया है:

1. नरेश कुमार: इन्हें प्रशासन में मुख्य तैनाती दी गई है। उनके पास जायका (JICA) परियोजना का अतिरिक्त प्रभार पहले की तरह बना रहेगा। यह परियोजना जापान के सहयोग से चल रही है।

2. दीपक कुमार: इन्हें तराई पूर्वी वन प्रभाग, हल्द्वानी से हटाकर पिथौरागढ़ वन प्रभाग की जिम्मेदारी दी गई है। शासन ने इसकी वजह अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र की संवेदनशीलता और प्रशासनिक जरूरत बताई है।

3. राहुल मिश्रा: कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक पद से हटाकर इन्हें तराई पूर्वी वन प्रभाग, हल्द्वानी का DFO बनाया गया है। इसके पीछे जनहित और विभागीय कामकाज को सुचारू बनाने का हवाला दिया गया है।

4. आदित्य रत्न: पिथौरागढ़ से हटाकर हल्द्वानी में उपवन संरक्षक (Deputy Conservator) की जिम्मेदारी दी गई है। यह बदलाव पारिवारिक परिस्थितियों के चलते उनके अनुरोध के आधार पर किया गया है।

5. शिरीन संजय: राजाजी राष्ट्रीय पार्क के उपनिदेशक पद से हटाकर इन्हें कॉर्बेट टाइगर रिजर्व का उपनिदेशक बनाया गया है। कॉर्बेट की संवेदनशीलता, वन्यजीव संरक्षण और प्रशासनिक कार्यों के प्रभावी संचालन को इस बदलाव का आधार बताया गया है।

ताजा IFS तबादले का सीधा असर चार बड़े क्षेत्रों पर पड़ेगा। हल्द्वानी में तराई के जंगलों में मानव-गुलदार संघर्ष के मामले ज्यादा हैं। पिथौरागढ़ में वन तस्करी और सीमा क्षेत्र के प्रबंधन की चुनौती है। कॉर्बेट और राजाजी में 15 नवंबर से पर्यटन सीजन शुरू हो रहा है, वहां नई टीम को तुरंत व्यवस्थाएं संभालनी होंगी।वन विभाग के जानकारों का मानना है कि एक महीने में दूसरी बार हुए इस फेरबदल से फील्ड में सख्ती बढ़ेगी।

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