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हरिद्वार गंगा घाट से लेकर जोशीमठ तक छट की धूम !

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हरिद्वार/ जोशीमठ : बिहार और पूर्वांचल के सबसे महत्वपूर्ण लोक पर्व छठ पूजा हरिद्वार से लेकर देवभूमि उत्तराखंड के अंतिम नगर जोशीमठ में भी पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। हरिद्वार में पर हरकी पैड़ी समेत तमाम गंगा घाटों पर उगते सूर्य को अर्घ देने के लिए बिहार और पूर्वांचल के लोग जमा हुए। वहीं भगवान नरसिंह की भूमि जोशीमठ नगर में भी अपनी आजीविका चला रहे बिहार और उत्तर प्रदेश के सैकड़ों प्रवासी स्वर्णकारो,राज मिस्त्री परिवारो सहित अन्य दिहाड़ी मजदूरी करने वाले लोगों ने बड़े हर्षोलास के साथ लोक आस्था का पर्व छठ पूजा मनाया, गांधी मैदान में संपन्न हुए इस पूजन कार्यक्रम में उदयीमान सूर्य देवता की उपासना की।

जहां उन्होंने विधि विधान के साथ सूर्य को अर्घ दिया और उनसे समाज की उन्नति के साथ परिवार के कल्याण की कामना की. श्रद्धालु प्रियंका ने बताया कि जो भी सूर्य भगवान की आराधना सच्चे मन से करता है, उसकी सभी कामनाएं पूरी होती है और धन धान्य से पूर्ण हो जाता है.. हरिद्वार में छठ पूजा के चलते हरकी पैड़ी समेत सभी गंगा घाटों पर अनुपम दृश्य देखने को मिला रहा है. ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे यह उत्तराखंड नहीं पूर्वांचल ही हो उन्होंने यह भी बताया कि छठ पूजा का व्रत चतुर्थी को शुरू होकर सप्तमी को संपन्न होता है. इस दौरान सूर्य मेष राशि में प्रवेश करते हैं. माना जाता है कि सूर्य भगवान की आराधना करने से सभी ग्रह अनुकूल हो जाते हैं. यह व्रत शादी शुदा महिलाओं के लिए ही होता है और सूर्य देव को अर्घ के साथ फल आदि भी अर्पित किए जाते हैं. छठ पर्व चार दिवसीय होता है, जिसमें नहाए खाए, खरना, व्रत और षष्ठी सप्तमी को उद्यापन होता है

इस पूजन कार्यक्रम में उदयीमान सूर्य देवता की उपासना के साथ ही सीमांत नगर जोशीमठ में चार दिवसीय छठ महापर्व संपन्न हो गया. जोशीमठ नगर में बड़ी संख्या में व्रतियों और श्रद्धालुओं ने सूर्यदेव को अ‌र्घ्य दिया और छठी मैया से अपनी मनोकामना पूर्ण करने की मन्नत भी मांगी। व्रतियों व उनके स्वजनो ने भी भगवान भास्कर से समाज व देश के हित की कामना की।

नहाय-खाय से शुरू हुआ यह चार दिवसीय पर्व सुबह के अ‌र्घ्य देने के साथ ही संपन्न हो गया। व्रतियों ने 36 घंटे के निर्जला व्रत के बाद छठ पर्व पर सूर्यदेव और उनकी बहन छठी मैया की उपासना का बहुत महत्व है। छठ का व्रत काफी कठिन माना जाता है। 36 घंटे निर्जला व्रत रखने के बाद उगते सूर्य को अ‌र्घ्य देने के साथ यह पूर्ण हो जाता है। यह कठिन व्रत परिवार की सुख-समृद्धि और संतान की लंबी आयु के लिए रखा जाता है।सोमवार तड़के 4 बजे से ही व्रतियों ने गांधी मैदान पहुंचकर सूर्य देवता और छठी मैया की उपासना शुरू कर दी थी। इसके बाद सूर्योदय होते ही अ‌र्घ्य देने का सिलसिला शुरू हो गया। जोशीमठ के गांधी मैदान में छठ पूजा की अद्भुत छटा दिखी। लोक आस्था के इस महापर्व पर सीमांत नगर जोशीमठ में पूर्वी समाज की आस्था का सैलाब उमड़ा नजर आया।