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उत्तराखंड जमीन दाखिल खारिज प्रक्रिया को लेकर राजस्व परिषद का बड़ा फैसला, शुरू होगा ‘नामांतरण दिवस’

सतेंद्र रावत, देहरादून, 3 अक्टूबर 2026 : उत्तराखंड जमीन दाखिल खारिज प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए धामी सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सूबे में अब जमीन के म्यूटेशन (नामांतरण) के लिए आम जनता को महीनों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। राजस्व परिषद की आयुक्त और सचिव रंजना राजगुरु ने देहरादून में हुई एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। सरकार अगले महीने से प्रदेश की हर तहसील में विशेष ‘नामांतरण दिवस’ शुरू करने जा रही है, जिससे पेंडिंग मामलों का निपटारा मौके पर ही किया जा सके।

इस महत्वपूर्ण बैठक में साफ किया गया कि तहसीलदार और नायब तहसीलदार जमीन से जुड़े हर केस को तय समय सीमा के भीतर ही निपटाएंगे। खासकर हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जैसे मैदानी जिलों में समन तामील की धीमी प्रक्रिया पर विशेष नजर रखने को कहा गया है।

राजस्व परिषद के 4 बड़े और कड़े निर्देश

अधिकारियों की कार्यप्रणाली को सुधारने और उत्तराखंड जमीन दाखिल खारिज प्रक्रिया को रफ्तार देने के लिए आयुक्त रंजना राजगुरु ने 4 मुख्य बिंदु तय किए हैं:

अनावश्यक देरी पर रोक: नामांतरण के किसी भी केस में बेवजह की देरी बर्दाश्त नहीं होगी। सभी फैसले गुण-दोष के आधार पर मेरिट देखकर समय पर किए जाएं।

रोजाना रिकॉर्ड अपडेट: तहसीलों में कोर्ट के कागज और संबंधित रजिस्टर को रोजाना अपडेट रखा जाए ताकि किसी भी स्तर पर पारदर्शिता बनी रहे।

फाइलें रिकॉर्ड रूम भेजें: जो भी केस पूरी तरह से निपट चुके हैं, उनकी फाइलें तुरंत रिकॉर्ड रूम में जमा कराई जाएं, जिससे जरूरत पड़ने पर अपील प्रक्रिया में देरी न हो।

समन की समय पर तामील: विवादित मामलों में नोटिस या समन को समय पर संबंधित पक्ष तक पहुंचाया जाए, विशेषकर हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में इसकी मॉनिटरिंग होगी।

आम आदमी को होने वाली परेशानियों से मिलेगी निजात

गौरतलब है कि वर्तमान में उत्तराखंड जमीन दाखिल खारिज प्रक्रिया में लगने वाले लंबे समय के कारण आम जनता को भारी मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना झेलनी पड़ती है। जमीन की रजिस्ट्री होने के बाद भी महीनों तक नामांतरण न होने से लोग अपनी ही संपत्ति पर लोन लेने, उसे आगे बेचने या राजस्व रिकॉर्ड में अपना नाम चढ़वाने के लिए भटकते रहते हैं। कलेक्ट्रेट और तहसीलों के बार-बार चक्कर काटने से समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती है। कई बार भ्रष्टाचार और बिचौलियों के कारण गरीब किसान और आम नागरिक परेशान होते हैं। सरकार समर्थकों का मानना है कि सरकार के इस नए कदम और ‘नामांतरण दिवस’ की शुरुआत से बिचौलियों का राज खत्म होगा और सीधे आम आदमी को समय पर न्याय मिल सकेगा।

इस अहम समीक्षा बैठक में सरकार की ओर से चकबंदी निदेशक नरेश चंद्र दुर्गापाल, उप आयुक्त मीनाक्षी पटवाल और शासकीय अधिवक्ता नितिन वशिष्ठ समेत सभी जिलों के अपर जिलाधिकारी (ADM) मुख्य रूप से मौजूद रहे। सभी अधिकारियों को इस व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से लागू करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

धरातल पर बदलाव का इंतज़ार: एक विश्लेषण

अब देखने वाली बात यह होगी कि सरकार और शासन की तरफ से इस नई व्यवस्था को लेकर किए जा रहे बड़े-बड़े दावे धरातल पर आम लोगों की सहूलियत को कितना बढ़ाते हैं और उनकी पुरानी परेशानियों को कितना कम करते हैं। उत्तराखंड में पहले भी कई तरह के डिजिटल और प्रशासनिक सुधारों की घोषणाएं की जा चुकी हैं, लेकिन अक्सर फाइलों के मकड़जाल और कर्मचारियों की सुस्ती के कारण वे योजनाएं दम तोड़ देती हैं। म्यूटेशन की इस जटिल प्रक्रिया में बिचौलियों का असर खत्म करना और समय सीमा में काम कराना वास्तव में एक बड़ी चुनौती होगी। बहरहाल, जनता को राहत देने वाले इस एक और सरकारी दावे पर राज्य के लोग उत्सुकता के साथ नज़रें बनाए रखेंगे कि ‘नामांतरण दिवस’ उनकी उम्मीदों पर कितना खरा उतरता है।
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