वैधानिक मतदाता पंजीकरण प्रपत्र-6 में किए गए बदलाव पूरी तरह गलत और अवैध ?
मीडिया लाइव, देहरादून: मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त ओपी रावत ने एसआईआर को एक ऐसी व्यवस्था करार दिया है, जिसने मतदाताओं के मन में डर पैदा कर दिया है। उनके मुताबिक, वैधानिक मतदाता पंजीकरण प्रपत्र-6 में किए गए बदलाव पूरी तरह गलत और अवैध हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मौजूदा तीन सदस्यीय चुनाव आयोग के दो सदस्यों ने भी पिछले दस महीनों में कम से कम चौदह बार प्रपत्र-6 में बदलाव और मतदाता सूची के डेटाबेस को केंद्रीकृत करने पर आपत्ति दर्ज की है।
पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त ओपी रावत ने एसआईआर को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि यह व्यवस्था मतदाताओं में डर पैदा कर रही है और प्रपत्र-6 में बदलाव अवैध हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पत्रकारीय प्लेटफॉर्म्स पर चल रही बहस के मुताबिक, मौजूदा तीन सदस्यीय चुनाव आयोग के दो सदस्यों ने पिछले दस महीनों में कम से कम चौदह बार मतदाताओं के पंजीकरण और नाम हटाने को लेकर प्रपत्र-6 में बदलाव तथा मतदाता सूची के डेटाबेस पर नियंत्रण को केंद्रीकृत करने पर आपत्ति दर्ज की है।
देश की तमाम विपक्षी पार्टियों की तरफ से आपत्ति दर्ज कराए जाने के बाद भी निर्वाचन आयोग ने कई राज्यों में विधानसभा चुनाव कराए। पश्चिम बंगाल में विवाद के तूल पकड़ने के बाद मतदाता सूची में नाम फिर से शामिल कराने के लिए अपीलीय न्यायाधिकरणों में अपील की व्यवस्था की गई।
पश्चिम बंगाल में अब तक जितने मामलों का निपटारा हो सका है, उनमें से करीब नब्बे फीसद लोगों के नाम फिर से मतदाता सूची में शामिल किए गए। जाहिर है, ये लोग वैसे मतदाता हैं, जिन्हें विधानसभा चुनावों में मत डालने का अधिकार नहीं मिला। सवाल है कि ऐसे लाखों मतदाताओं के मतदान के हक से वंचित होने की जिम्मेदारी किसकी है!
इसके अलावा पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी ने एसआईआर पर बहुत तीखा बोला है। उन्होंने कहा एक भी असली वोटर का नाम कटना आयोग पर धब्बा है। कुरैशी ने कहा – “बड़ी संख्या में असली वोटरों के नाम काटे गए हैं, और एक भी असली वोटर का नाम कटना चुनाव आयोग पर धब्बा है। आयोग को जवाबदेह होना पड़ेगा। मैं तो इसे आपराधिक जिम्मेदारी भी कहूंगा।”इसके अलावा पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी ने एसआईआर पर बहुत तीखा बोला है। उन्होंने कहा एक भी असली वोटर का नाम कटना आयोग पर धब्बा है। कुरैशी ने कहा – “बड़ी संख्या में असली वोटरों के नाम काटे गए हैं, और एक भी असली वोटर का नाम कटना चुनाव आयोग पर धब्बा है। आयोग को जवाबदेह होना पड़ेगा। मैं तो इसे आपराधिक जिम्मेदारी भी कहूंगा।”
मौजूदा दो निर्वाचन आयुक्तों के सवालों से आयोग की साख कसौटी पर है। राज्यों में लाखों मतदाताओं को बाहर करके आयोजित कराए गए चुनावों के नतीजों को भी अब संदिग्ध बताया जाने लगा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चुनाव आयोग पर ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के बाद विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहे हैं।
