संस्कृति-पर्यावरण

चलाया जाएगा राज्यव्यापी जागरूकता और पौध रोपण अभियान

मीडिया लाइव, देहरादून : आम आदमी की भूमिका तय करने के मकसद से हिम फाउंडेशन उत्तराखण्ड में पर्यावरण संरक्षण – मेरी जिम्मेदारी, मेरा उत्तराखंड अभियान चलाने जा रहा है. फाउंडेशन के संचालकों का दावा है कि इस अभियान का मकसद महज खानापूर्ति कर पौधारोपण करना नहीं है. बल्कि उत्तराखण्ड के हर नागरिक को पर्यावरण संरक्षण का सक्रिय सहभागी बनाना है। इस अभियान के जरिये कोशिश की जाएगी कि हर व्यक्ति खुद को पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी माने, और अपनी जिम्मेदारी निभाए . तभी एक स्थायी और हरित भविष्य का निर्माण संभव हो पाएगा।

फाउंडेशन वर्ष 2035 तक उत्तराखंड के हर गाँव, परिवार, विद्यालय, महाविद्यालय, सरकारी कार्यालय, निजी संस्थान तथा सार्वजनिक स्थल हरियाली से समृद्ध हो और उत्तराखंड देश के सबसे हरित एवं पर्यावरण-संवेदनशील राज्यों में पहचान स्थापित करने की दिशा में बढ़ाना चाहता है। इस अभियान के तहत आम जन को अपने घर, कार्यालय, विद्यालय, महाविद्यालय, पार्क, खेत, मंदिर परिसर तथा अन्य सार्वजनिक स्थलों पर पौधारोपण करने के लिए प्रेरित किया जाएगा. साथ ही रोप गए पौधों के संरक्षण की जिम्मेदारी वे खुदे उठाएं। जिससे केवल पौधे लगा कर ही नहीं बल्कि उन्हें वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी उठाए।

हमारा विश्वास है कि यदि उत्तराखंड का प्रत्येक परिवार कम-से-कम पाँच पौधों का संरक्षण करने का संकल्प ले, तो वर्ष 2035 तक राज्य करोड़ों नए वृक्षों से आच्छादित हो सकता है। यह अभियान केवल हरियाली बढ़ाने का प्रयास नहीं होगा, बल्कि जल संरक्षण, जैव विविधता, स्वच्छ वातावरण, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक जनआंदोलन सिद्ध होगा।

यह अभियान जनभागीदारी आधारित स्वैच्छिक पहल के रूप में प्रस्तावित है, जिसमें सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय भार डाले बिना हर नागरिक अपने व्यक्तिगत संसाधनों, समय और सामाजिक दायित्व के भाव से पौधारोपण एवं उनके संरक्षण में योगदान देगा। यह अभियान “पर्यावरण संरक्षण – मेरी जिम्मेदारी” की भावना को जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास करेगा तथा सामाजिक दायित्व का एक प्रेरणादायी उदाहरण बनेगा।

मुख्यमंत्री, राज्य सरकार, जनप्रतिनिधियों तथा सभी विभागों जहाँ भी विकास कार्यों कर रही है, जैसे सड़क निर्माण, भवन निर्माण अथवा अन्य परियोजनाओं के कारण वृक्षों का कटान किया जाए, वहाँ संबंधित विभाग या निर्माण एजेंसियाँ उसी क्षेत्र में स्थानीय ग्रामवासियों, नगरवासियों, स्वयंसेवी संस्थाओं और जनप्रतिनिधियों के सहयोग से कम-से-कम दोगुने पौधों का रोपण व उनके संरक्षण को सुनिश्चित करें। साथ ही इस कार्य की सार्वजनिक जानकारी व प्रमाण स्थानीय जनता के समक्ष उपलब्ध कराए जाएँ, जिससे नागरिकों का विश्वास सुदृढ़ हो तथा विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन का संदेश समाज तक पहुँचे।

यह अभियान एक व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप ले सकता है, क्योंकि जनभागीदारी में वह शक्ति होती है जो किसी भी बड़े लक्ष्य को सफल बना सकती है। यह अभियान केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समाज को एक-दूसरे से जोड़ने, स्थानीय समस्याओं पर सकारात्मक संवाद स्थापित करने, समाधान खोजने तथा उत्तराखंड के सतत विकास के लिए सामूहिक चिंतन का एक सशक्त मंच भी बनेगा।

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