पशु स्वास्थ्य सेवा में लगी मोबाइल वेटनरी यूनिट्स सर्विस आंकड़ों से उत्साहित
मीडिया लाइव, देहरादून : उत्तराखंड में मोबाइल वेटनरी यूनिट्स सेवा दे रही कम्पनी ने बड़ा दावा किया है। कम्पनी की तरफ से दी गयी जानकारी के मुताबिक उत्तराखंड में प्रभावी रूप से दी जा रही सेवा के तहत करीब 4 लाख 39 हजार से अधिक पशुओं का सफल उपचार किया गया। यह सेवाएं राज्य में पशु चिकत्सा सेवा के तहत संचालित 1962 मोबाइल वेटनरी यूनिट्स के माध्यम से राज्यभर में उपलब्ध कराई जा रही है। कम्पनी का कहना है इस सेवा के तहत उत्तराखंड में पशुपालन विभाग के जरिये 1962 मोबाइल वेटनरी यूनिट (MVU) सेवा से राज्य में पशु स्वास्थ्य सेवाओं में काफी हद तक सुधार हुआ है। इस सेवा से 16 नवम्बर 2022 से 22 मार्च 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, कुल 4,39,164 पशुओं का सफल उपचार किये जाने की बात कही गयी है। कम्पनी इससे काफी हद तक उत्साहित नजर आ रही है।
कम्पनी ने जो आंकड़े पेश किए हैं उसके मुताबिक : इस सेवा के तहत राज्य में
• कुल कॉल्स प्राप्त: 6,47,612
• केस संबंधित कॉल्स: 2,81,880
• कुल पशु उपचार: 4,39,164
• फरवरी 2026 में ही:-
• लाभार्थी: 6,840
• उपचारित पशु: 23,646
वे पशु जिन्हें उपलब्ध कराई गयी स्वास्थ्य सुविधा
• गाय (Cattle): 2,18,851 (49.83%)
• बकरी (Goat): 1,26,453 (28.79%)
• भैंस (Buffalo): 37,191 (8.47%)
• कुत्ते (Dog): 24,649 (5.61%)
• घोड़े (Horse): 13,036 (2.97%)
• अन्य: 12,851
जिलेवार उत्तराखंड में MVU सेवाओं का प्रभाव देखने को मिला: देहरादून: 68,481, पिथौरागढ़: 57,377, पौड़ी गढ़वाल: 39,251, हरिद्वार: 37,675, उत्तरकाशी: 32,626, अल्मोड़ा, 32220 , बागेश्वर : 15961, चमोली : 29103, चम्पावत : 23501, नैनीताल : 26181, रुद्रप्रयाग ,17848, टिहरी : 28307, उधम सिंह नगर : 30633 में पशुओं का उपचार किया गया। सेवा प्रदाता संस्था पेश किये गए आंकड़ों से ख़फ़ी हद तक आस्वस्त नजर आ रही है। साथ ही इस सेवा को और अधिक प्रभावी बनाए जाने के लिए प्रायसरत रहने की बात कर रही है।

कम्पनी के राज्य प्रभारी आशीष नेगी ने बताया कि “मोबाइल वेटनरी यूनिट्स के माध्यम से हम दूर-दराज के क्षेत्रों तक पशु स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने में सफल हुए हैं। यह पहल पशुपालकों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रही है।” मोबाइल वेटनरी यूनिट्स की यह पहल न केवल पशुओं के स्वास्थ्य सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पशुपालकों की आय बढ़ाने में भी सहायक साबित हो रही है।