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आइए जानते हैं ऑपरेशन सिंदूर पर मीडिया ब्रीफिंग में क्या कहा.

नई दिल्ली : 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर पर मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि “हमारी खुफिया जानकारी से संकेत मिलता है कि भारत के खिलाफ और हमले हो सकते हैं। इस प्रकार, रोकने और रोकने दोनों के लिए मजबूरी थी और इसलिए भारत ने इस तरह के और अधिक सीमा पार आतंकवाद को रोकने के लिए जवाब देने के अपने अधिकार का प्रयोग किया… हमारी कार्रवाई नपी-तुली और गैर-बढ़ती, आनुपातिक और जिम्मेदार थी। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा- आतंकवादियों के बुनियादी ढांचे को खत्म करने पर ध्यान केंद्रित किया।

विदेश सचिव विक्रम मिस्री, कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर मीडिया के सामने एक प्रेजेंटेशन भी दिया। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा- “22 अप्रैल 2025 को लश्कर और पाकिस्तान से जुड़े आतंकवादियों ने कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर हमला किया और 25 भारतीय नागरिकों और 1 नेपाली नागरिक की हत्या कर दी… उन्होंने पर्यटकों के सिर में उनके परिवार के सदस्यों के सामने गोली मार दी। परिवार को धमकाया गया और उस बर्बरता का संदेश देने के लिए कहा गया। चूंकि जम्मू-कश्मीर में पर्यटन फिर से फल-फूल रहा था, इसलिए हमले का मुख्य उद्देश्य उसे नुकसान पहुंचाना था।”

कर्नल सोफिया कुरैशी ने मीडिया को बताया कि कैसे भारतीय सशस्त्र बलों ने गुलपुर आतंकी शिविर, कोटली को निशाना बनाया, जो एलओसी से 30 किलोमीटर दूर स्थित था और लश्कर-ए-तैयबा का अड्डा था। यह शिविर राजौरी-पुंछ क्षेत्र में सक्रिय था। पुंछ में 20 अप्रैल, 2023 को हुए हमले और 9 जून, 2024 को तीर्थयात्रियों की बस पर हुए हमले में शामिल आतंकवादियों को इसी शिविर में प्रशिक्षित किया गया था। कर्नल सोफिया कुरैशी ने बताया, “पहलगाम आतंकी हमले के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया गया था। नौ आतंकी शिविरों को निशाना बनाया गया और उन्हें नष्ट कर दिया गया।”

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि पहलगाम हमले ने आतंकवादियों से पाकिस्तान के रिश्तों को बेनकाब कर दिया है। उन्होंने कहा- “पहलगाम हमले की जिम्मेदारी द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) नामक समूह ने ली है। यह समूह लश्कर-ए-तैबा से जुड़ा है। इस हमले में पाकिस्तान का हाथ होने की पुष्टि हुई है। 25 अप्रैल को मीडिया रिलीज से टीआरएफ का जिक्र हटाने के लिए पाकिस्तान के दबाव को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। पहलगाम आतंकी हमले ने पाकिस्तान के आतंकियों से संबंधों को उजागर कर दिया है।”

विदेश सचिव ने कहा- पहलगाम में हमला बेहद बर्बरतापूर्ण था, जिसमें ज़्यादातर पीड़ितों को नज़दीक से और उनके परिवार के सामने सिर पर गोली मारकर मारा गया। परिवार के सदस्यों को जानबूझ कर इस तरह से मारा गया कि उन्हें संदेश वापस लेने के लिए कहा गया। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा, “यह हमला स्पष्ट रूप से कश्मीर में सामान्य स्थिति को कमज़ोर करने के उद्देश्य से किया गया था।”

यहां पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में नौ आतंकी ठिकानों की सूची दी गई है जिन्हें सफलतापूर्वक निष्क्रिय कर दिया गया है। यह जानकारी पीटीआई ने रक्षा सूत्रों के हवाले से दी है।

1. मरकज़ सुभान अल्लाह, बहावलपुर – जैश ए मोहम्मद

2. मरकज़ तैयबा, मुरीदके – लश्कर ए तैबा

3. सरजल, तेहरा कलां – जैश ए मोहम्मद

4. महमूना जोया, सियालकोट – हिज्बुल मुजाहिदीन

5. मरकज़ अहले हदीस, बरनाला – लश्कर ए तैबा

6. मरकज़ अब्बास, कोटली – जैश ए मोहम्मद

7. मस्कर राहील शाहिद, कोटली – हिज्बुल मुजाहिदीन

8. शावई नाला कैंप, मुजफ्फराबाद – लश्कर ए तैबा

9. सैयदना बिलाल कैंप, मुजफ्फराबाद – जैश ए मोहम्मद

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