खेती- किसानी

गाँव बचाओ अभियान में जुटे ये दो ग्रामीण

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मीडिया लाइव, पौड़ी : जनजागरण से गांवों से हो रहे पलायन को रोकने और भूतहा होते गांवों को बचाने के लिए एक मुहिम चलाई जा रही है। जिसका नाम रखा गया है गाँव बचाओ अभियान। इस अभियान के तहत पौड़ी जिले के दूरस्त क्षेत्र बीरोंखाल के स्थानीय बाजारों और ग्रामीणों के बीच पहुँच कर गहन मंथन किया जा रहा है। यह बीड़ा उठाया राज्य आंदोलनकारी अर्जुन सिंह रावत ने और इस मुहिम में उनका साथ दे रहे हैं श्रवण कुमार रावत। ये दोनों लोग इसी संकल्प के साथ निकल पड़े हैं ग्रामीण जनता की बीच। इसका कारन है कि पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार खेती बाड़ी से लोगों का मोह भंग होता जा रहा है। सब कुछ बाजार और नकद रुपये पर निर्भर रह गया। अब लोग अपने खाने के लिए भी खेती करने को तैयार नहीं हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में अधिकांश खेती बंजर में तब्दील होती जा रही है। लोग थोड़ा बहुत ही इस पर काम कर रहे हैं। इसकी बहुत सी वजहें हैं।

इन वजहों और भविष्य की जरूरतों को गंभीरता अर्जुन और श्रवण लोगों को बता रहे हैं कि अपने-अपने गांव बचाने है तो हमें पुनः कृषि और बागवानी की तरफ लौटना पड़ेगा। उत्तराखंड से पलायन का मुख्य कारण स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार की कमी होना है। वे बता रहे हैं कि ग्लोबल वार्मिंग की वजह से अब मानसून सिमट गए हैं और असामान्य होते जा जा रहे हैं। जब सही समय पर अच्छी बारिश होती है तो फसल भी अच्छी हो जाती है पर इसके बाद किसानों की मेहनत को बंदर, लंगूर, सूअर, हिरण, काखड़, भालू जैसे जंगली जानवर बर्बाद कर देते हैं।

अर्जुन रावत बताते हैं हमने इसका उपाय यह सोचा है कि ऐसी पैदावार की जाए जो कम बारिश में भी हो जाए और जिसे जंगली जानवर भी बर्बाद ना कर सके। उत्तराखंड में बहुत सारी ऐसे कृषि उत्पाद हैं जो कम बारिश में भी अच्छा उतपादन दे सकते हैं। जिन्हें जंगली जानवर बर्बाद भी नहीं कर पाते हैं। जैसे हल्दी, अदरक, काली हल्दी, एलोवेरा, लेमनग्रास, नींबू, अश्वगंधा इत्यादि. इन फसलों से किसानों की आय भी बढ़ सकती है। इन औद्यानिक और कृषि उत्पादों की बाजार में काफी मांग भी है और इनके अच्छे भाव भी किसान भाइयों को मिल जाता है। जहाँ यह खेती हो रही है वहां रोजगा के साधन बढे हैं।

जान जागरूकता चला रहे अर्जुन लोगों को बता रहे हैं कि हमने पिछले साल चार खेतों को आबाद करके लगभग 70 किलो हल्दी लगाई थी जिसमें से हमने कुछ हल्दी इस बार निकाल दी है और बाकी को अगले साल के लिए छोड़ दिया है। इस साल हम लोग लगभग चार और खेतों को कृषि लायक बनाएंगे और इन खेतों में काली हल्दी लगाएंगे। देखते हैं कि हमारा गांव बचाने का यह अभियान कितना कारगर सिद्ध होता है।अर्जुन सिंह रावत डुमैला तल्ला, बीरोंखाल के रहने वाले हैं।