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MEDIA LIVE: राह भटके बुजुर्ग नजीर अहमद का सहारा बनी पुलिस, कश्मीर वासी हैं राहगीर

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मीडिया लाइव, सतपुली: कोरोना काल में जिंदगी बचाने को लेकर हर आमोखास भारी जद्दोजहद से गुजर रहा है। अच्छे खासे होशो हवास वाले लोग भी भारी असमंजस में जी रहे हैं। ऐसा ही एक वाकया पिछले दिनों गढ़वाल जनपद के सतपुली क्षेत्र में देखने को मिला, जहां
कोरोना कर्फ्यू के दौरान देर रात पुलिस को एक असहाय बुजुर्ग व्यक्ति सतपुली में घूमते हुए दिखाई दिए। जिस पर कस्बा ड्यूटी में तैनात पुुुुलिस केे जवान तेज सिंह की उस शख्स पर नजर पड़ी, उन्हें यह व्यक्ति असहाय और बहुत परेशान लग रहा था।

सिपाही ने बुजुर्ग से बातचीत कर जानकारी जुटाने की कोशिश की, रात का समय था, भूखा प्यासा यह शख्स सिपाही को सारी दास्तान सुना बैठा। सिपाहीी तेज सिंह ने सबसे पहले खाना खिलाया। फिर मामले की पूरी जानकारी थानाध्यक्ष को दी। बुजुर्ग को थाने लाया गया।

पुलिस के मुताबिक इन बुजुर्ग शख्स ने सिलसिलेवार तरीके से अपने बारे में पूरी जानकारी थानाध्यक्ष के सामने रखी और बताया कि मेरा नाम नजीर अहमद पुत्र अब्दुल अहमद शेख निवासी जम्मू है। साथ ही कहा कि वह बीते 10 दिनों से पैदल चलकर गाजियाबाद से यंहा पहुंचे हैं। डरे सहमे, रोते – बिलखते हुए बूढ़े सख्श ने कहा कि मुझे जम्मू जाना था, लेकिन न जाने कैसे यंहा आ गया हूँ। इस पर थानाध्यक्ष ने बुजर्ग की पीड़ा को समझते हुए उनकी रुकने की व्यवस्था की। अगले रोज स्थानीय अस्पताल सतपुली में उनका मेडिकल व कोविड टेस्ट कराया गया।

इसके बाद उनको स्थानीय ग्राम मलेठी के वृद्धाश्रम में ठहराया गया। जंहा पर थानाध्यक्ष संतोष पैथवाल ने खुद जाकर बुजर्ग नजीर अहमद का हालचाल जाना। साथ ही उन्हें जरूरी सामान उपलब्ध कराया। अब पुलिस बुजर्ग के सम्बंध में उनके मूल घर से सम्पर्क साधने की कोशिशों में जुट गई है। एसओ ने बताया, जल्दी ही पूरी जानकारी मिलने के बाद उन्हें उनके घर भेजने की व्यवस्था की जाएगी।

इस पूरे वाकये में सबसे अहम बात यह है कि जहां पूरे देश भर में समाज जाति धर्म और संप्रदाय के नाम पर बंटता नजर आ रहा है, वहीं देवभूमि उत्तराखंड की पुलिस ने जो फर्ज यहां पर निभाया है, वह वाकई वर्दी की वास्तविक सेवा की मिसाल को साबित करने के लिए एक शानदार उदाहरण है।