एसटी समुदाय के जीवन को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध
मीडिया लाइव, चमोली : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को जनपद चमोली के बिरही (बेडूबगड़) में नीति-माणा जनजाति कल्याण समिति चमोली की ओर से आयोजित तीन दिवसीय “जनजाति समागम 2026” के समापन कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में कहा कि ये कार्यक्रम हमारी जनजातीय परंपराएं, सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम है। जनजातीय समाज ने सदियों से अपनी परंपराओं और प्रकृति संरक्षण की भावना को पहचान दिलाने का काम किया है कहा हमारे सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले जनजातीय भाई देश के सजग प्रहरी भी हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा जनजातीय समाज के उत्थान के लिए निरंतर कदम उठाए जा रहे हैं। समाज के अंतिम छोर पर रहने वाले व्यक्ति तक विकास पहुंचना चाहिए। जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान, एकलव्य आदर्श विद्यालय समेत जनजातीय समाज के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं। जिससे जनजातीय समाज की आजीविका बढ़ी है।
उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज के लिए आवंटित होने वाले बजट को बढ़ाकर 3 गुना कर दिया है। आज जनजातीय समुदाय को बुनियादी सुविधाओं का लाभ भी मिल रहा है वहीं विपक्ष ने जनजातीय समाज को हमेशा वोट बैंक समझा। लेकिन उन्होंने कभी भी जनजातीय समाज को आगे बढ़ने के अवसर प्रदान नहीं किए। जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान के अंतर्गत प्रदेश में 128 गांवों को चिन्हित किया गया है जहां रोजगार के साथ ही बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य पर विशेष फोकस किया जा रहा है।
उन्होंने कहा जनजातीय समुदाय की बेटियों के विवाह हेतु 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है तथा जनजातीय शोध संस्थान के लिए 1 करोड़ रुपये का कॉर्पस फंड भी स्थापित किया गया है। वहीं, जनजातीय संस्कृति को संरक्षित और प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से राज्य में प्रतिवर्ष जनजाति महोत्सव एवं खेल महोत्सव का आयोजन भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा हमारा प्रयास है कि देवभूमि में पलायन रुके और हमारे युवाओं को अपने ही गाँव में रोजगार के अवसर मिलेंगे, इसी दिशा में होम स्टे योजना एक मजबूत माध्यम बनकर उभरी है।
आज चमोली जनपद में 800 से अधिक होम स्टे संचालित हो रहे हैं, जिनसे 4 हजार से अधिक स्थानीय लोग स्वरोजगार से जुड़ चुके हैं।वहीं, उत्तराखंड की जनजातीय संस्कृति अपने आप में पर्यटन का एक बड़ा आकर्षण है। इसलिए होम स्टे के साथ-साथ साहसिक, धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के जरिए न कवल आजीविका के नए अवसर सृजित कर रहे हैं, बल्कि अपनी समृद्ध परंपरा और संस्कृति को भी वैश्विक पहचान दिला रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा हमारे सीमांत क्षेत्रों में विकास कार्यों को भी नई गति मिली है। नीति-माणा घाटी के सीमांत गांव जैसे माणा, नीति, मलारी और लाता आज विकास की मुख्यधारा से तेज़ी से जुड़ रहे हैं।
नीति घाटी भोटिया जनजाति के शीतकालीन प्रवास एवं अन्य भूमि संबंधी मामलों का निस्तारण किया जाएगा, बेडू बगड़ भोटिया पड़ाव में सामुदायिक भवन का निर्माण, गौरा देवी की प्रतिमा एवं पार्क निर्माण किया जाएगा, बैरासकुंड मंदिर का सौंदर्यीकरण किया जाएगा, बेडू बगड़ पड़ाव की भूमि को सुरक्षित करने के लिए कार्य किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी घोषणाओं का परीक्षण के उपरांत आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
इस मौके पर थराली विधायक भूपाल राम टम्टा, कर्णप्रयाग विधायक अनिल नौटियाल,भाजपा जिला अध्यक्ष गजपाल बर्त्वाल, जिला पंचायत अध्यक्ष चमोली दौलत सिंह बिष्ट,पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र सिंह भंडारी, नगर पालिका अध्यक्ष गोपेश्वर संदीप रावत, नीति माणा जनजाति कल्याण समिति के अध्यक्ष हरीश परमार, मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार बीडी सिंह, दलबीर दानू, राज्य मंत्री हरक सिंह नेगी, भाजपा महामंत्री अरुण मैठाणी, विनोद कनवासी, बीकेटीसी के उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती, चंद्रकला तिवारी, नंदी राणा, जिलाधिकारी गौरव कुमार, पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार, मुख्य विकास अधिकारी डॉ अभिषेक त्रिपाठी सहित सभी जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद थे।